हल्दिया हाथों ने
फैला दीं हथेलियाँ,
और लिख दिया
किरणों ने नाम चुपके से
प्रियतम का .
शर्मसार हुईं पंखुरियाँ,
सिहर-सिहर गईं,
लहक गईं डालियाँ,
महक सी छा गई वादियों में,
पवन ने दिया संदेशा,
ली है अंगडाई सजन ने,
चम्पई मन हो उठा गदगद ,
सुंदर सपने सा रोमांचक .
शुचिपूर्ण चम्पा,
गदरा उठी वादियों में,
कलियों ने खोल दिए पट,
सद्यस्नाता सी,
ओस की बूँदें बदन
पर लिए,
कैसी ओजस्विनी लग रही है !
मेरे आँगन में खिली चम्पा.
------------------------------------मंजु महिमा
(अहमदाबाद)—24/6/2013

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