22-8-2019
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी-
केवडिया ग्राम गुजरात में ( अहमदाबाद से करीब 200 किमी. दूर ) नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर डेम के ठीक सामने एक पहाड़ी पर बनी यह विश्व की सबसे ऊँची मूर्ति है, जिसकी लम्बाई 182 मीटर (597 फीट) है, बिना आधार को जोड़े । इसके बाद विश्व की दूसरी सबसे ऊँची मूर्ति चीन में स्प्रिंग टैम्पल बुद्ध है, जिसकी आधार के साथ कुल ऊंचाई 208 मीटर (682 फीट) हैं।


स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का कुल वजन 1700 टन है. इसके पैर की ऊंचाई 80 फीट, हाथ की ऊंचाई 70 फीट, कंधे की ऊंचाई 140 फिट और चेहरे की ऊंचाई 70 फिट है. इस मूर्ति के पैर का अंगूठा ही 9 फीट लम्बा है। मूर्ति के नीचे खड़े लोग बौने नज़र आते हैं। वे हाथ उठाकर पैरों तक भी नहीं पहुंच पाते हैं।

153 मीटर,की ऊंचाई पर जहाँ सरदार सा.की मूर्ति का सीना है, अंदर से लिफ्ट से पहुँचा जा सकता है। 
200 लोग एक साथ मूर्ति के ऊपरी तले में बनी गैलरी में आ सकते हैं। कहा जाता है कि इस मूर्ति के निर्माण कार्य पर 989हजार करोड़ रुपये की लागत आई है।
यहाँ से तीनों राज्य, मध्यप्रदेश, गुजरात, और महाराष्ट्र की सीमा रेखा की पहाड़ियों को देखा जा सकता है।

इसमें इस्तेमाल हुईं सामग्रियां: पीतल, कांसा, प्रबलित कंक्रीट, इस्पात है और इस मूर्ति का निर्माण राम वी. सुतार की देखरेख में हुआ है, जो अभी 93वर्ष के हैं।

लार्सन एंड टूब्रो कंपनी ने इसके निर्माण और रखरखाव का दायित्व लिया है। इस विशाल मूर्ति का निर्माण कार्य 31 अक्तूबर 2013 में प्रारंभ होकर 31अक्तूबर 2018 में पूर्ण रुपेण समाप्त हो गया , जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। सच ही आज की तारीख में इसे विश्व के प्रमुख अजूबों में शामिल किया जा सकता है। ' यह वह विवरण है जो वहाँ गाइड ने हमें सुनाया। ☺☺पर जो दृश्य हमने वहाँ देखा वह अद्भुत था... माँ प्रकृति के कोमल अंक में धानी आंचल से लिपटी लोह पुरुष सरदार पटेल की वह कठोर मूर्ति अडिगता, निश्चय की दृढ़ता और दूरदर्शिता का संदेश देती नज़र आती है।
अभी इसे अद्भुत पर्यटन स्थल बनाने के प्रयास जारी हैं और कई परियोजनाएं इससे जुडी़ हैं और दिन - रात कार्य चल रहा है। निसंदेह यह गुजरात का एक अविस्मरणीय और गर्व करने योग्य पर्यटन स्थल बनेगा।

इस विशाल मूर्ति के अवलोकन का सौभाग्य हमें मिला,जयपुर से पधारे मेरे चाचाजी के सौजन्य से।

यद्यपि हम सप्ताह के मध्य में गए थे, पर फिर भी बहुत अधिक पर्यटक आए हुए थे, हमें जगह-जगह एक- एक घंटे कतार में खड़े रहना पडा़, कल्पना कीजिए यदि सप्ताह के अंतिम दिनों में जाते तो क्या हाल होता 🤔लेकिन थकान के बावजूद भी अफसोस नहीं हुआ, लगा कि समय से देख लिया व्हील चेयर नहीं लेनी पडी़ 😄😄😄

हाँ, थकान का आलम क्या होगा, आप कल्पना कर सकते हैं, साथ ही उस भव्य दृश्य को देखने के आनंद की भी। फूलों की घाटी ने मन मोह लिया, धूप-छांवी मौसम में आप भी वहाँ का नज़ारा इन फोटोओं से लीजिए और देखने जाने का मानस बना लीजिए.. 😎😎 हाँ, एक दिन टैन्ट में रहकर अपनी थकान भी उतारिए और सुंदर, स्वच्छ पर्यावरण का भी आनंद लीजिए,।कुछ दिन तो गुजारिए गुजरात में😄😄






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