रेत के घरौंदे बनाएँ,
खेल-खेल में,
मौजों से टकराएँ.
हाथ में हाथ लिए,
जाफरानी धूप में,
कुछ देर नहाएं.
नीलगूं समंदर को,
देर तक देखते.
कुछ सुहाने पलों से,
चलो भुला के सारे गम,
समंदर के किनारे,
बैठ बतियाएं,
कुछ तुम्हारी सुनें,
कुछ अपनी सुनाएं.
नज़दीकियाँ हों,
धड़कनों की.
चलो भुला के सारे गम,
समंदर के किनारे,
बैठ बतियाएं.
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें